One thought on “Parshuram Ki Pratiksha”

  1. "जीवन गति है, वह नित अरूद्य चलता है,पहला प्रमाण पावक का, वह जलता है । सिखला निरोध-निर्ज्वलन धर्म छलता है,जीवन तरंग-गर्जन है, चंचलता है । धधको अभंग, पल-विपल अरूद्य जलो रे !धारा रोके यदि राह, विरुद्ध [...]

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